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टीएमसी में मची खलबली! 50 विधायक बना सकते हैं अलग गुट, दावे शुरू ...
June 2, 2026 Source: Rashtra Wire
यह खबर पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते विवाद और संभावित अंदरूनी संकट को लेकर चर्चा में है। सिग्नेचर फर्जीवाड़ा मामले के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कुछ विधायकों ने दावा किया है कि बैठक रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं हैं, जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। इसी मामले में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से भी संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
विवाद के बीच पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वाले दो विधायकों—ऋतब्रत बंदोपाध्याय और संदीपान साहा—को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं टीएमसी में भी वैसी ही टूट की स्थिति तो नहीं बन रही जैसी वर्ष 2022 में महाराष्ट्र में शिवसेना के भीतर देखने को मिली थी। कई राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि पार्टी के कुछ विधायक और सांसद मौजूदा नेतृत्व से नाराज हैं तथा अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि बड़ी संख्या में विधायक पार्टी से दूरी बना सकते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल की घटनाओं ने इन चर्चाओं को और बल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में भी अपेक्षित संख्या में विधायक नहीं पहुंचे। बताया गया कि कुल 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही बैठक में शामिल हुए, जबकि अधिकांश विधायक अनुपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने पार्टी की एकजुटता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि लगातार बढ़ रहे मतभेद और सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे आरोप-प्रत्यारोप टीएमसी के लिए चुनौती बन सकते हैं। वहीं विपक्षी दल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर पैदा हुए संकट के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कुछ असंतुष्ट नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि विपक्षी दल तृणमूल के विधायकों और सांसदों पर दबाव बना रहा है तथा उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि कुछ विधायकों ने उनसे शिकायत की है कि उन्हें विभिन्न मामलों में कार्रवाई की धमकी देकर बैठकों में शामिल होने से रोका जा रहा है।
फिलहाल टीएमसी के भीतर चल रहा यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है और असंतुष्ट नेताओं का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।