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गहरे गर्त में जा रहा पाकिस्तान, छह साल में 2.7 करोड़ लोग हुए गरीब, 7% बढ़ी गरीबी…
June 12, 2026 Source: Rashtra Wire
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और हाल ही में जारी पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे 2025–26 के आंकड़ों ने इस संकट को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में देश में गरीबी दर में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे करीब 2.7 करोड़ नए लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान में कुल गरीब आबादी अब लगभग 7 करोड़ तक पहुँच गई है।
यह सर्वे, जो संघीय बजट से पहले जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दस्तावेज है, देश के आर्थिक संकेतकों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। आंकड़ों के अनुसार, 2018–19 में पाकिस्तान की गरीबी दर 21.9 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024–25 में 28.9 प्रतिशत हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत हो गई है।
प्रांतीय स्तर पर भी सभी क्षेत्रों में गरीबी में वृद्धि दर्ज की गई है। पंजाब में गरीबी 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत, सिंध में 24.5 प्रतिशत से 32.6 प्रतिशत, खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 प्रतिशत से 35.3 प्रतिशत और बलूचिस्तान में 41.8 प्रतिशत से 47 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इनमें बलूचिस्तान सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है, जबकि पंजाब में गरीबी का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा।
रिपोर्ट में गरीबी बढ़ने के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जिनमें लंबे समय तक आर्थिक संकट, रिकॉर्ड महंगाई, मुद्रा अवमूल्यन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सख्त स्थिरीकरण उपाय, प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़ और क्षेत्रीय संघर्ष शामिल हैं। इसके साथ ही देश में आय असमानता भी बढ़ी है, जिसका संकेत गिनी गुणांक में वृद्धि से मिलता है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति और सामाजिक असमानता की गंभीर तस्वीर पेश करती है।