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वनाग्नि पर त्वरित कार्रवाई के लिए आधुनिक फायर अलर्ट सिस्टम, रिस्पॉन्स टाइम घटा

September 1, 2026 Source: Rashtra Wire

रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने विभागीय गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ‘हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। सरकार का फोकस केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं एवं युवाओं के लिए रोजगार, वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक आधारित वन प्रबंधन पर भी है। किसान वृक्ष मित्र योजना से खेती के साथ बढ़ रही हरियाली सरकार ने वृक्षारोपण को किसानों की आय से जोड़ने के लिए **किसान वृक्ष मित्र योजना** शुरू की है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत वित्तीय अनुदान और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिल रहा देश में सबसे अधिक संग्रहण दर का लाभ छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है, जिसे देश में सर्वाधिक बताया गया है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया और उन्हें 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। इसके अलावा 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई है, जबकि वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका वितरण प्रस्तावित है। समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसके लिए संग्राहकों को 16.66 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वहीं राजमोहीनी देवी सुरक्षा योजना के तहत 1,862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में 12.07 करोड़ रुपये दिए गए हैं। महिला स्व-सहायता समूहों को वनोपज आधारित आजीविका से जोड़ा प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और पीएम जनमन योजना के अंतर्गत लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों की 70 हजार से अधिक सदस्य लाभान्वित हुई हैं। वन धन केंद्रों से जुड़ी महिला समूहों को 5 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन मिला है। इन केंद्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण किया गया, जिनका मूल्य 4.42 करोड़ रुपये रहा। बस्तर में शांति के साथ रोजगार के नए अवसर मंत्री श्री कश्यप के अनुसार बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद वन विभाग ने अति-संवेदनशील क्षेत्रों में वानिकी एवं विदोहन कार्य दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य किए जाएंगे। इन गतिविधियों से लगभग **21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार** सृजित होने का अनुमान है। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ाने के साथ पलायन कम करने और लोगों का जल-जंगल-जमीन एवं बस्तर की संस्कृति से जुड़ाव मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। दूरस्थ वन क्षेत्रों में सड़क, मोबाइल और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार सरकार वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर एवं 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति दी गई। वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300 से 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई। वहीं बीएसएनएल के 62 में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ में बढ़ी बाघों की संख्या वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी राज्य ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 18 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर **35** हो गई है। यह करीब 94 प्रतिशत की वृद्धि है। 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरु घासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। एनटीसीए ने बांधवगढ़ से तीन बाघों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी दी है। बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या भी 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की थी। मानव-हाथी संघर्ष कम करने में तकनीक और जनभागीदारी मानव-हाथी द्वंद्व को कम करने के लिए **‘गज संकेत’ ऐप** और ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से तकनीक तथा सामुदायिक भागीदारी को जोड़ा गया है। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर जागरूकता का कार्य कर रहे हैं। 12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस के अवसर पर दरभा में ‘गज संकेत’ ऐप का विमोचन किया गया। इस पहल को राज्य स्तरीय सुशासन पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। ईको-टूरिज्म से प्रकृति संरक्षण और रोजगार को बढ़ावा छत्तीसगढ़ में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुके हैं। प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों के लिए 2.60 करोड़ रुपये के प्रस्तावित लक्ष्य के मुकाबले 2.21 करोड़ रुपये की सकल आय दर्ज की गई। बस्तर के धुड़मारास में सामुदायिक पर्यटन के माध्यम से 40 प्रत्यक्ष और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बने हैं तथा पांच कमरों का ‘धुवाडेरा’ होमस्टे विकसित किया गया है। महासमुंद के शिशुपाल इको ट्रेल को 45 लाख रुपये की लागत से विकसित किया गया है। ## बस्तर की जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर जोर वन एवं जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को भी सरकार प्राथमिकता दे रही है। पिछले ढाई वर्षों में 19.05 करोड़ रुपये खर्च कर वन क्षेत्रों में **572 देवगुड़ियों** का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। नारायणपुर के ग्राम गढ़बेंगाल में बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक संस्था ‘घोटुल’ के संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया गया है। कांगेर घाटी को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने की पहल वर्ष 2025 में 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। क्षेत्र की गुफाएं, तीरथगढ़ जलप्रपात और समृद्ध जैव विविधता इसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन स्थल बनाती हैं। कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट कोपरा जलाशय कोपरा जलाशय, बिलासपुर को छत्तीसगढ़ का पहला **रामसर साइट** घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में 20 रामसर साइट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में 11,096 आर्द्रभूमियों की ग्राउंड ट्रुथिंग और बाउंड्री डिमार्केशन का कार्य पूरा किया गया है तथा 500 से अधिक वेटलैंड मित्र कार्यरत हैं। ## डिजिटल और आधुनिक वन प्रशासन पर जोर वन विभाग की भुगतान प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल किया गया है और इसे भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर तथा ई-कोष प्लेटफॉर्म से एकीकृत किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 209 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान हुआ। वन विभाग में ई-ऑफिस को मुख्यालय से लेकर सभी वनमंडल स्तर तक 100 प्रतिशत लागू किया गया है। वनाग्नि से सुरक्षा के लिए आधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम भी संचालित है, जिससे प्रतिक्रिया समय 1-2 घंटे से घटकर लगभग 5-10 मिनट रह गया है। निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण को आजीविका, रोजगार, पर्यटन, जनजातीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य वन संपदा की रक्षा के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर बढ़ाना है।

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