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आतंकी नेटवर्क पर प्रहार, NIA कोर्ट ने दी 7 साल सजा

May 3, 2026

आतंकी नेटवर्क पर प्रहार, NIA कोर्ट ने दी 7 साल सजा
बेंगलुरु की एक विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आरोपी को सात साल की सजा सुनाई है। दोषी विक्रम कुमार उर्फ छोटा उस्मान को भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत कठोर कारावास के साथ 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला 2023 में बेंगलुरु जेल के अंदर हुए कट्टरपंथीकरण और आतंकी साजिश से जुड़ा है। जांच एजेंसी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) के अनुसार, विक्रम कुमार को जेल में बंद रहने के दौरान लश्कर के सदस्य टी. नसीर और सह-आरोपी जुनैद अहमद ने कट्टरपंथी बनाकर संगठन में शामिल किया था। रिहाई के बाद भी वह इनके संपर्क में बना रहा और आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल हो गया। एनआईए की जांच में सामने आया कि मई 2023 में विक्रम ने हरियाणा के अंबाला से हथगोले और वॉकी-टॉकी जैसे उपकरण जुटाए और उन्हें बेंगलुरु में एक अन्य आरोपी को सौंपा। इसके अलावा वह टी. नसीर को अदालत ले जाते समय फरार कराने की बड़ी साजिश का भी हिस्सा था। यह साजिश भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से रची गई थी। इस मामले में अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिनमें से 8 को दोषी ठहराकर सजा दी जा चुकी है। हालांकि, मुख्य आरोपी जुनैद अहमद अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। यह केस पहली बार जुलाई 2023 में सामने आया था, जब बेंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरणों के साथ कुछ संदिग्धों को पकड़ा था। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेकर जेल के अंदर चल रहे कट्टरपंथी नेटवर्क और आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा किया। कुल मिलाकर, यह फैसला आतंकी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत देता है, वहीं फरार आरोपियों की गिरफ्तारी अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।