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डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी, पेट्रोल एक्साइज में कोई छेड़छाड़ नहीं

May 5, 2026 Source: Rashtra Wire

डीजल और जेट फ्यूल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटी, पेट्रोल एक्साइज में कोई छेड़छाड़ नहीं
मई 2026 की शुरुआत में केंद्र सरकार ने ईंधन से जुड़े कर ढांचे में अहम बदलाव करते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधन 1 मई से लागू होने वाले आगामी पखवाड़े के लिए किया गया है। नई दरों के तहत डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 23 रुपये प्रति लीटर और जेट फ्यूल (ATF) पर 33 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। हालांकि, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह शून्य ही बनी हुई है। सरकार हर 15 दिन में समीक्षा कर इन दरों में संशोधन करती है, और इस बार कटौती का लाभ मुख्य रूप से तेल कंपनियों और एयरलाइंस सेक्टर को मिल सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी करने की योजना नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद आम जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि दूसरी ओर, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में भारी बढ़ोतरी की गई है। प्रति सिलेंडर लगभग 993 रुपये की वृद्धि के बाद दिल्ली में इसकी कीमत 3000 रुपये से अधिक हो गई है। इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्टोरेंट, शादी-ब्याह और स्ट्रीट वेंडर्स जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत में भी 261 रुपये की वृद्धि की गई है, जो खासतौर पर मजदूरों, प्रवासी कामगारों और छात्रों को प्रभावित करेगी। इन बढ़ती कीमतों के पीछे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा वहन करता है। सप्लाई बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है।