Sunday, May 24, 2026
English edition
Rashtra Wire Rashtra Wire

India, As It Happens

Politics

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, चुनाव हार के बाद टूटने लगा करीबी तंत्र

May 7, 2026 Source: Rashtra Wire

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, चुनाव हार के बाद टूटने लगा करीबी तंत्र
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़े स्तर पर हलचल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी प्रशासनिक और सलाहकार ढांचे में लगातार इस्तीफों की झड़ी लग गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हालांकि चुनावी हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और उन्होंने बीजेपी तथा चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए “वोट चोरी” का दावा किया है। लेकिन दूसरी ओर उनकी सरकार और प्रशासनिक टीम में अस्थिरता के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। सबसे पहले इस्तीफा देने वालों में ममता बनर्जी के बेहद करीबी और पूर्व मुख्य सचिव रहे अलापन बंद्योपाध्याय शामिल हैं, जिन्हें बाद में मुख्य सलाहकार बनाया गया था। उन्हें ममता बनर्जी का प्रशासनिक दिमाग और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। उन्होंने चुनाव परिणाम के अगले ही दिन पद छोड़ दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में आश्चर्य बढ़ गया। इसके अलावा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे पश्चिम बंगाल औद्योगिक और वित्तीय विकास संस्थानों से जुड़े थे और राज्य की आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण “नैतिक आधार” बताते हुए कहा कि सरकार बदलने और चुनावी हार के बाद उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं है। राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। वे सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण कानूनी मामलों, जैसे भर्ती घोटाले और चुनावी हिंसा से जुड़े केसों में पैरवी कर रहे थे। उनके इस्तीफे को भी प्रशासनिक बदलाव की बड़ी कड़ी माना जा रहा है। इसके अलावा मीडिया सलाहकारों और कई वरिष्ठ पत्रकारों, जिन्हें सरकार में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया था, ने भी अपने पदों से किनारा कर लिया है। इन घटनाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद टीएमसी के “इकोसिस्टम” में तेजी से टूटन देखने को मिल रही है। कई सहयोगी और भरोसेमंद चेहरे एक-एक कर सरकार से अलग हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। कुल मिलाकर, चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव और अस्थिरता का दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है, जहां सत्ता परिवर्तन के असर प्रशासनिक ढांचे तक गहराई से पहुंचते नजर आ रहे हैं।