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दक्षिणा काशी के रूप में विकसित होगा मूसी नदी का मंदिर परिसर

May 11, 2026 Source: Rashtra Wire

दक्षिणा काशी के रूप में विकसित होगा मूसी नदी का मंदिर परिसर
तेलंगाना सरकार हैदराबाद की मूसी नदी के किनारे एक भव्य मंदिर परिसर विकसित करने की तैयारी कर रही है, जिसे भविष्य की “दक्षिणा काशी” के रूप में पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना मूसी नदी के कायाकल्प और रिवरफ्रंट विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। मंचिरेवुला क्षेत्र में लगभग आठ एकड़ भूमि पर बनने वाले इस धार्मिक परिसर का केंद्र श्री ओंकारेश्वर स्वामी मंदिर होगा, जिसके साथ कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाए जाएंगे। प्रस्तावित परिसर में श्री ललिता महा त्रिपुरा देवी, श्री बाला सुब्रमण्य स्वामी, श्री वीरभद्रकाली और श्री बाला गणपति के मंदिर शामिल होंगे। इसके अलावा विशाल महाराजा गोपुरम, विभिन्न दिशाओं में राजा गोपुरम, यज्ञशाला, प्रवचन मंडपम, कल्याण मंडपम और पारंपरिक मंदिर रसोई जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। पूरी परियोजना पारंपरिक भारतीय मंदिर वास्तुकला और आगम शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 28 मार्च को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मंदिर परिसर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल रामप्पा मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित होगा। सरकार ने इसके लिए मास्टर प्लानिंग, वास्तुकला और इंजीनियरिंग सेवाओं हेतु विशेषज्ञ सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। परियोजना का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थल बनाना नहीं, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण केंद्र बनाना है। योजना में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल संचयन, बिजली, निगरानी और भीड़ प्रबंधन जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही ‘नक्षत्र वनम’ जैसे पारंपरिक प्राकृतिक तत्वों को स्थानीय पर्यावरण के साथ जोड़ा जाएगा। मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट छह महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद अगले 30 महीनों तक निर्माण और कार्यान्वयन का काम जारी रहेगा। खास बात यह है कि यह परियोजना राज्य सरकार की व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक विकास नीति का हिस्सा है, जिसके तहत पुरानापुल में मस्जिद, गौलीगुडा में गुरुद्वारा और नागोले में चर्च बनाने की भी योजना है, ताकि धार्मिक समावेशिता को बढ़ावा दिया जा सके।