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अमेरिका-ईरान टकराव से बढ़ी मुश्किलें, सरकार पर बढ़ सकता है बोझ
May 11, 2026 Source: Rashtra Wire
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सबसे बड़ा असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ा है, जो लगातार भारी नुकसान झेल रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) जैसी कंपनियों को रोजाना लगभग 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। पिछले करीब 10 हफ्तों से ये कंपनियां पेट्रोल और डीजल को लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं। अनुमान है कि अब तक इन कंपनियों का कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं। दिल्ली में आज भी पेट्रोल लगभग 94 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 87 रुपये प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है, जो पिछले दो वर्षों के स्तर के बराबर है।
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए LPG सिलेंडर की कीमत में केवल 60 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की है। वहीं दूसरी ओर कमर्शियल LPG सिलेंडर के दामों में बड़ा इजाफा किया गया है। इस महीने की शुरुआत में कमर्शियल सिलेंडर लगभग 933 रुपये महंगा हुआ, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहती हैं, तो तेल कंपनियों को संचालन जारी रखने के लिए भारी पूंजी की जरूरत पड़ेगी। उन्हें न केवल कच्चा तेल खरीदने बल्कि रोजमर्रा के खर्चों को संभालने के लिए भी अतिरिक्त फंड जुटाना होगा।
ऐसी स्थिति में सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तो सरकार को कंपनियों को राहत पैकेज या सब्सिडी देनी पड़ सकती है। आने वाले समय में यह संकट भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाल सकता है।