India
दिल्ली में C&D साइट्स के लिए नए नियम, 100 GSM डस्ट नेट अनिवार्य
May 12, 2026 Source: Rashtra Wire
राजधानी दिल्ली में बढ़ते धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब दिल्ली में सभी निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) स्थलों पर हाई-डेंसिटी डस्ट स्क्रीन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल होने वाली ग्रीन नेट की न्यूनतम मोटाई 100 GSM तय की गई है। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल दिल्ली के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। पहले निर्माण सामग्री और मलबे को ढकने के लिए ग्रीन नेट या तिरपाल का इस्तेमाल अनिवार्य था, लेकिन उसकी गुणवत्ता को लेकर कोई स्पष्ट मानक तय नहीं था। अब 100 GSM का मानक लागू होने से धूल नियंत्रण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
नए नियम के तहत सभी बिल्डरों, निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को निर्धारित मानकों के अनुसार हाई-डेंसिटी डस्ट स्क्रीन लगानी होगी। नियमों का पालन न करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। DPCC ने सभी प्रोजेक्ट संचालकों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्णय CAQM के दिशा-निर्देशों और निर्माण एवं तोड़फोड़ परियोजनाओं की निगरानी से जुड़े नियमों के तहत लिया गया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री Majinder Singh Sirsa ने कहा कि सरकार प्रदूषण को लेकर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नई तकनीक, मॉनिटरिंग सिस्टम और सख्त नियमों के जरिए प्रदूषण को कम करने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार हाई-डेंसिटी डस्ट स्क्रीन सामान्य नेट की तुलना में धूल को रोकने में अधिक प्रभावी होती हैं।
सरकार डस्ट पोर्टल 2.0 पर भी तेजी से काम कर रही है, जिसके जरिए दिल्ली की सभी निर्माण और तोड़फोड़ साइट्स की निगरानी की जाएगी। पहले ही सभी C&D साइट्स का पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया जा चुका है ताकि निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाई जा सके। यह आदेश MCD, NDMC, DDA, DMRC, CPWD और PWD सहित कई प्रमुख एजेंसियों को तत्काल पालन के लिए भेज दिया गया है।