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सुप्रीम कोर्ट में NEET-UG केस, परीक्षा प्रणाली बदलने की मांग

May 13, 2026 Source: Rashtra Wire

सुप्रीम कोर्ट में NEET-UG केस, परीक्षा प्रणाली बदलने की मांग
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दायर कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA को हटाने और उसकी जगह नई स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि NEET-UG 2026 की परीक्षा न्यायिक निगरानी में दोबारा आयोजित कराई जाए। साथ ही सीबीआई से चार हफ्तों के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी गई है। FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट से एक हाई लेवल कमेटी गठित करने की अपील की है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम Court के रिटायर्ड जज करें। इस कमेटी में साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और फोरेंसिक साइंटिस्ट को शामिल करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए NTA में बड़े सुधार जरूरी हैं। इसके अलावा “नेशनल एग्जाम इंटीग्रिटी कमीशन” (NEIC) नाम से नई संस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है। याचिका में परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इसमें प्रश्नपत्रों को डिजिटल लॉक करने, पेपर ट्रांसपोर्ट की प्रक्रिया खत्म करने और ऑफलाइन परीक्षा की जगह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल अपनाने की मांग शामिल है। उनका कहना है कि इससे पेपर लीक की घटनाओं को रोका जा सकेगा। राजस्थान में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद NTA ने NEET-UG परीक्षा रद्द कर दी थी। मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है। जांच में सामने आया कि परीक्षा का पेपर प्रिंटिंग से पहले ही लीक हो गया था। बताया गया कि बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल हूबहू परीक्षा में आए थे। इस परीक्षा में करीब 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। सीबीआई ने इस मामले के मुख्य आरोपी शुभम खैरनार को महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने 10 लाख रुपए में पेपर खरीदा और फिर अलग-अलग राज्यों के लोगों को 15 लाख रुपए प्रति सेट के हिसाब से बेचा। जांच में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा समेत पांच राज्यों से इस रैकेट के तार जुड़े मिले हैं। गुरुग्राम के एक डॉक्टर और देहरादून के आरोपी राकेश मंडवारिया का नाम भी सामने आया है। राकेश पर करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का आरोप है। मामले ने देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।