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फलता सीट पर पहली जीत की तलाश में BJP, देबांग्शु पांडा पर टिकी निगाहें

May 20, 2026 Source: Rashtra Wire

फलता सीट पर पहली जीत की तलाश में BJP, देबांग्शु पांडा पर टिकी निगाहें
पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अचानक बेहद दिलचस्प हो गया है। डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का लंबे समय से दबदबा रहा है, लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से अचानक इनकार कर दिया। जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है और उनके हटने से विपक्ष को बड़ा मौका मिल गया है। फलता सीट पर दोबारा मतदान इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि चुनाव आयोग ने पिछले मतदान को गंभीर आरोपों के चलते रद्द कर दिया था। वोटरों को धमकाने और EVM से छेड़छाड़ जैसे आरोपों ने इस सीट को पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बना दिया है। चूंकि यह क्षेत्र अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में आता है, इसलिए इस चुनाव को TMC की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फलता विधानसभा सीट कभी वामपंथियों का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, लेकिन पिछले दो दशकों में यहां TMC का प्रभाव तेजी से बढ़ा। तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार 2001 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी और उसके बाद BJP यहां कभी जीत हासिल नहीं कर सकी। हालांकि इस बार TMC उम्मीदवार के हटने के बाद BJP के लिए संभावनाएं बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अब मुकाबला मुख्य रूप से BJP, कांग्रेस और CPI(M) के बीच माना जा रहा है। BJP ने देबांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है। 46 वर्षीय देबांग्शु पेशे से वकील हैं और स्नातक शिक्षित हैं। उनके हलफनामे के मुताबिक उनकी वार्षिक आय करीब 12 लाख रुपये है। हालांकि उनके खिलाफ 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें कई गंभीर मामले भी शामिल बताए गए हैं। कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। 65 वर्षीय मोल्ला 12वीं तक शिक्षित हैं और उनकी कुल संपत्ति लगभग 57.7 लाख रुपये बताई गई है। वहीं CPI(M) ने संभु नाथ कुर्मी को उम्मीदवार बनाया है। 61 वर्षीय कुर्मी 10वीं पास हैं और उनकी संपत्ति करीब 9.5 लाख रुपये है। फलता उपचुनाव अब केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह बंगाल की बदलती राजनीति और TMC के प्रभाव की बड़ी परीक्षा बन चुका है। सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या BJP पहली बार यहां जीत का इतिहास रच पाएगी या फिर TMC का प्रभाव बरकरार रहेगा।