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नौतपा के दौरान क्यों किया जाता है दान? जानिए 9 दिनों की खास परंपरा
May 22, 2026 Source: Rashtra Wire
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा की शुरुआत मानी जाती है। इस दौरान मौसम में तेज बदलाव देखने को मिलता है और गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। इन नौ दिनों में सूर्य की किरणें अधिक तीव्र होती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा केवल मौसम परिवर्तन का समय नहीं, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है।
भारतीय परंपरा में नौतपा के दौरान सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव को अर्घ्य देने और सादा जीवन अपनाने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस समय की गई पूजा, तप और सेवा का विशेष फल मिलता है। साथ ही समाज में जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। भीषण गर्मी के बीच लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जल सेवा, भोजन वितरण और उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है।
नौतपा के हर दिन अलग-अलग प्रकार के दान का विशेष महत्व बताया गया है। पहले दिन ठंडा पानी, शरबत और प्याऊ की व्यवस्था करने की परंपरा है ताकि राहगीरों को गर्मी से राहत मिल सके। दूसरे दिन गेहूं और चावल जैसे अन्न का दान जरूरतमंद परिवारों के लिए शुभ माना जाता है। तीसरे दिन छाछ, लस्सी और ठंडे पेय पदार्थ बांटे जाते हैं। चौथे दिन पंखे और हाथ वाले पंखों का दान गर्मी से बचाव के लिए किया जाता है।
इसके बाद पांचवें दिन सूती वस्त्र, छठे दिन छाते और चप्पलों, सातवें दिन तौलिया और गमछा, आठवें दिन फल और हल्के भोजन का दान करने की परंपरा है। वहीं नौवें और अंतिम दिन जल से भरे घड़े या मटका सार्वजनिक स्थानों पर रखने को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।
धार्मिक मान्यता है कि नौतपा के दौरान किए गए दान और सेवा कार्य न केवल लोगों को राहत पहुंचाते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि भी लाते हैं।